- धीरेंद्र गुप्ता
Ken Betwa Project: छतरपुर, पन्ना प्रशासन द्वारा केन बेतवा, रूंझ, मुझगाय, नेगुवा और एन टी पी सी प्रभावितों को चिता आंदोलन के 17 वें दिन रविवार सुबह 7 बजे बल का प्रयोग करते हुए हटाया था इस पर प्रशासन द्वारा अमित भटनागर के गिरते स्वास्थ्य का बहाना बना पल्ला झाड़ने की कोशिश भी की थी पर घटना स्थल से आ रहे फोटो वीडियो प्रशासन की बर्बरता और उसके झूठ की कहानी साफ बयां कर रही थी. प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा देने के बाद एक तरफ प्रशासन ने चैन की सांस ली ही थी कि अमित भटनागर ने अस्पताल में किसी भी तरह की दबा और बोतल लगाने से साफ इंकार करते हुये अपने आमरण अनशन जारी रखने की घोषणा कर दी.
प्रशासन के काले चेहरे को सामने लाकर रहेंगे
अमित भटनागर के संकल्प के आगे उनके माता पिता भाई बेटे परिजन सहित विभिन्न वरिष्ठ जनों की अपील भी बेअसर ही साबित हुई. हालांकि अमित भटनागर का स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ने के कारण उनको जिला अस्पताल के आई सी यू में भर्ती कर दिया गया है, पर अमित भटनागर वहां भी डॉक्टर और सभी के निवेदन के बावजूद अब भी गांधी के तरह अपने आमरण अनशन पर डटे हुए है, और प्रशासन की नींद हराम करे हुए है, आंदोलन स्थल से आंदोलन स्तर से जबरन हटाए गए प्रदर्शनकारियों ने भी अपने-अपने घरों से चूल्हा बंदी आंदोलन शुरू कर दिया है.
इसके समर्थन में ही जो लोग इस परियोजना से प्रभावित नहीं है उन्होंने भी उनके समर्थन में उपवास करना प्रारंभ कर दिया है. इससे प्रशासन की चिंताएं कम होने का नाम नहीं ले रही है साथ ही साथ अमित भटनागर में कहा है कि प्रशासन द्वारा चिता आंदोलन का दमन उनके स्वास्थ्य की चिंता में नहीं बल्कि अपने घोटाला बचाने की चिंता में किया है. अमित ने कहा कि प्रशासन लाख षड्यंत्र कर ले लेकिन उसका काला चेहरा सामने लाकर रहेंगे.
अमित भटनागर की टीम द्वारा केन वेतवा लिंक परियोजना की कानूनी प्रक्रिया में की गयी ग्राम सभा संबंधित प्रमाणित दस्तावेज साझा किए कर, ग्राम सभा के प्रमाणित दस्तावेज सजा कर परियोजना अंतर्गत की गयी ग्राम सभा के फर्जी खेल की पोल खोल दी, ढोड़न और खरयानी दो अलग-अलग राजस्व ग्राम है, लेकिन उनकी ग्राम सभा एक साथ की जाती है, एक इस और 16/02/2022 को की गई इस ग्राम सभा में रतीराम अहिरवार के सरपंच के रूप में हस्ताक्षर है.
फर्जी ग्राम सभा से संवैधानिक अधिकारों की हत्या
जबकि उक्त दिनांक को उमा मिश्रा सरपंच थी, जबकि रतिराम अहिरवार 6 माह बाद 8 जुलाई 2022 में सरपंच निर्वाचित हुए, पलकोहा की ग्राम सभा में तो सरपंच के भी हस्ताक्षर नहीं है, कुछ गाँव में तो सरपंच अंगूठा छाप है पर उनके फर्जी हस्ताक्षर कर लिए.
केन बेतवा लिंक परियोजना छतरपुर प्रभावित सभी 14 ग्राम म संबंधित ग्राम सभा के प्रस्ताव में न प्रस्ताव का नाम है न सर्मथक का ग्रामसमा में कितने लोग उपस्थित थे इसकी संख्या न किसी के हस्ताक्षर है, इस तरह से फर्जी ग्राम सभा कर लोगों के संवैधानिक अधिकारों की हत्या कर परियोजना में अपात्र लोगों को मुआवजे का एक बड़ा हिस्सा अधिकारियों और नेताओं की मिली भगत से डाल दिया गया है.
किसानों को आधा परदा मुआवजा
परियोजना प्रभावित आदिवासी किसानों को आधा परदा मुआवजा दिया जा रहा है. जिस कारण बार बार आंदोलन होते है लेकिन प्रशासन कई बार छूठ बोलकर तो कई बार दमन कर निकलने का प्रयास हर बार करता दिखता है. इस बार प्रशासन ने पन्ना जिले के लोग हैं अन्य परियोजनाओं के लोग हैं ऐसा कहकर अपना पल्ला झाड़ है पर जय किसान संगठन और उसके नेता अमित भटनागर ने केन बेतवा परियोजना संबंधित फर्जी ग्राम सभा के प्रमाणित दस्तावेज जो कि छतरपुर जिले से संबंधित है जारी कर अब गेंद प्रशासन के पाले में फेंक दी है.
यह भी पढ़ें: Ken Betwa आंदोलन: लाठीचार्ज से बचने के लिए छोटे बच्चों के साथ उफनती नदी में कूदी आदिवासी महिलाएं?
देखते हैं प्रशासन इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है. जबकि जय किसान संगठन ने अब छतरपुर जिले से संबंधित केन-बेतवा परियोजना के प्रमाणित दस्तावेज सार्वजनिक कर प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अमित भटनागर ने अंत में कहा, “प्रशासन कितना भी दमन कर ले, कितने भी षड्यंत्र रच ले, हम परियोजना में हुए भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़े और कानूनों के उल्लंघन को देश के सामने उजागर करके रहेंगे.”
Last Updated on July 20, 2026 8:27 pm
