Noida Resident Viral: क्या आप भी नोएडा जैसे शहर में एक घर खरीदने का सपना देखते हैं? आपको लग रहा होगा की 1 करोड़ रुपये के अंदर तो काफ़ी अच्छा घर मिल ही जाएगा. हमे बताते हुए खेद हो रहा है की महँगाई के इस ज़माने में ऐसा बिल्कुल मुमकिन नहीं है. नोएडा के एक व्यक्ति का ये दावा काफ़ी वायरल जा रहा है, जहाँ उन्होंने कहा कि कई नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की कीमत 2 करोड़ रुपये से 4 करोड़ रुपये के बीच है. इस दावे से यह बहस छिड़ गई है कि क्या शहर का प्रॉपर्टी मार्केट आम सैलरी वाले खरीदार की पहुंच से बाहर हो गया है.
1 करोड़ रुपये भी कम पड़े
इंस्टाग्राम पर शेयर करे गए इस वीडियो में कहा गया था कि “मैं अभी नोएडा में रहता हूँ और काफी समय से सोच रहा था कि इतना ज़्यादा किराया क्यों देता रहूँ, जबकि उस पैसे से होम लोन की EMI चुका सकता हूँ. इसलिए, मैंने यूँ ही कुछ प्रॉपर्टीज़ देखने का फ़ैसला किया, लेकिन प्रॉपर्टी डीलर 1 करोड़, 1.5 करोड़ और 2 करोड़ रुपये की कीमतें ऐसे बता रहा था जैसे ये कोई मामूली रकम हों.”
इसकी शुरुआत तो एक साधारण से विचार से हुई थी, पर कई कामकाजी लोगों की तरह, उन्होंने भी सोचा कि क्या ज़्यादा किराया देने के बजाय उस पैसे को होम लोन में लगाना ज़्यादा समझदारी होगी. लेकिन प्रॉपर्टी की जो खोज बस यूं ही शुरू हुई थी, वह जल्द ही असलियत का पता चलने जैसा अनुभव बन गई. हैरानी की बातें यहीं खत्म नहीं हुईं. जैसे-जैसे उन्होंने और प्रोजेक्ट्स देखे, उन्हें एहसास हुआ कि वह जितनी ज़्यादा से ज़्यादा रकम खर्च कर सकते थे, वह भी एक अच्छी प्रॉपर्टी के लिए कम ही पड़ने वाली थी.
क्या मिडल क्लास अचानक से बहुत अमीर हो चुकी है?
आश्चर्य की बात तो यह है कि प्रॉपर्टीज़ का दाम इतना ज़्यादा होने के बाद भी लोग इनको ख़रीद रहे थे. उन्हें हैरानी थी कि सैलरी पाने वाले लोग रोज़मर्रा के खर्चों, परिवार की ज़िम्मेदारियों और कभी-कभी वीकेंड पर घूमने-फिरने के साथ-साथ इतनी महंगी चीज़ें कैसे खरीद पा रहे हैं. उन्होंने पूछा, “मुझे सच में समझ नहीं आ रहा। क्या मिडिल क्लास अचानक इतना ज़्यादा कमाने लगा है?” उन्होंने वही सवाल पूछा जो कई दर्शक भी काफ़ी समय से खुद से पूछ रहे थे.
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सोशल मीडिया पे हुई बातचीत
कई यूज़र्स को लगा कि मौजूदा कीमतें घरों की असल कीमत के हिसाब से नहीं हैं और उन्होंने मार्केट को ‘ओवरहीटेड’ (ज़रूरत से ज़्यादा गर्म) बताया. एक कमेंट करने वाले ने कहा कि एक आम दो-बेडरूम वाले अपार्टमेंट को बनाने में उसकी बिक्री कीमत का बहुत छोटा हिस्सा ही खर्च होता है, फिर भी खरीदार बहुत ज़्यादा पैसे दे रहे हैं; उन्होंने इसे “प्रॉपर्टी बबल” कहा.
एक और व्यक्ति ने भी ऐसा ही अनुभव बताया, “हाँ, मैं सहमत हूँ. मैं भी यही सोच रहा हूँ. साथ ही, पुरानी सोसायटियों में प्रॉपर्टी की कीमत नई सोसायटियों की तुलना में ज़्यादा होती है.”
हर कोई इससे सहमत नहीं था
कुछ यूज़र्स का कहना था कि लोग सिर्फ़ अपार्टमेंट के लिए पैसे नहीं दे रहे हैं. एक कमेंट में बताया गया कि प्रीमियम हाउसिंग के साथ अक्सर ऐसी सुविधाएं मिलती हैं जिनके लिए कई खरीदार ज़्यादा पैसे खर्च करने को तैयार रहते हैं, जैसे बेहतर सिक्योरिटी, सुंदर गार्डन, स्विमिंग पूल, क्लबहाउस, साफ़-सुथरा माहौल और कामकाजी पेशेवरों की कम्युनिटी. दूसरे शब्दों में, कीमत सिर्फ़ घर के साइज़ (स्क्वायर फ़ुटेज) के आधार पर नहीं, बल्कि जीवनशैली को ध्यान में रखकर तय की जाती है.
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बाक़ी लोगों की सलाह इससे कहीं आसान थी
उन्होंने सुझाव दिया कि भारी-भरकम होम लोन लेने और उसे चुकाने में दशकों बिताने के बजाय, तब तक किराए के घर में रहना बेहतर है जब तक कि घर खरीदना आर्थिक रूप से आसान न हो जाए.
इस वायरल वीडियो ने लोगों की भावनाओं को गहराई से छुआ है. भारत के कई शहरों में घरों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, और नोएडा के रहने वाले व्यक्ति ने जो सवाल उठाया है, वही सवाल आज घर खरीदने की चाहत रखने वाले बहुत से लोग पूछ भी रहे हैं: क्या इन कीमतों पर आखिर घर खरीदा जा सकता है?
Last Updated on July 15, 2026 11:27 am
