PM Security Threat: पीएम मोदी को कब-कब जान का ख़तरा महसूस हुआ?

PM Security Threat: जिस देश के प्रधानमंत्री को खुद की जान का खतरा महसूस हो, वहां के आम नागरिकों की सुरक्षा की चिंता कौन करेगा?

PM Security Threat: पीएम मोदी को कब-कब जान का ख़तरा महसूस हुआ?
PM Security Threat: पीएम मोदी को कब-कब जान का ख़तरा महसूस हुआ?

PM Security Threat: आपको याद होगा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का वो बयान जिसमें उन्होंने कहा था कि सदन में प्रधानमंत्री के साथ अप्रत्याशित घटना हो सकती है. दरअसल, उस वक्त सदन नें महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर चर्चा होनी थी. लेकिन, प्रधानमंत्री ने उस अहम चर्चा में भाग नहीं लिया. क्योंकि, लोकसभा अध्यक्ष के मुताबिक पीएम मोदी की जान को खतरा था. लेकिन एक सवाल उठता है कि क्या सदन के अंदर अगर सांसदों से भी ख़तरा है तो फिर उसका दूसरा रास्ता क्या होगा? क्योंकि अगर संसद भवन भी सुरक्षित नहीं है तो फिर यह भारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़ा करता है कि जिस देश का प्रधानमंत्री ही सुरक्षित नहीं होगा, उस देश के नागरिकों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी कौन लेगा? ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी के लिए ऐसा पहली बार हुआ था. इससे पहले भी इस तरह की बात सामने आई थी. लेकिन पीएम मोदी को किससे ख़तरा था और इस महत्वपूर्ण विषय में आगे क्या कार्रवाई हुई? इस बारे में कोई जानकारी मौजूद नहीं है. देखते हैं पीएम मोदी को कब-कब जान का ख़तरा रहा है?

लोकसभा में प्रधानमंत्री को जान का खतरा क्यों?

याद कीजिए जब लोकसभा में बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सदन में चर्चा करनी थी, तो प्रधानमंत्री उस सत्र में नहीं पहुंचे क्योंकि उन्हें सवाल का जवाब देना था. Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तब संसद में कहा था कि उन्हें विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली कि कांग्रेस पार्टी के कई सदस्य पीएम के आसन तक पहुंचकर कोई भी अप्रत्याशित घटना कर सकते हैं. लोकसभा अध्यक्ष ने यह भी कहा था कि इसको टालने के लिए- “मैंने माननीय प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि उन्हें सदन में नहीं आना चाहिए.”

लेकिन जब देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे. तब (2014) राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के नेता पूर्व प्रधानमंत्री के सामने आकर पर्चे लहराने लगे, नारेबाजी करने लगे. लेकिन क्या कभी उन्होंने ऐसा कहा कि उनकी जान को खतरा था? हालांकि पीएम मोदी को किससे जान का ख़तरा था, स्पीकर साहब ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी. ना ही कोई जांच बिठाई. क्या प्रधानमंत्री जैसे महत्वपूर्ण शख्सियत की सुरक्षा को हल्के में लिया गया? यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि यह सब किसी सड़क या चौराहे पर नहीं हुआ, बल्कि देश के सबसे सुरक्षित स्थान संसद में हुआ. अगर सदन के अंदर भी सरकार सुरक्षा नहीं दे सकती, वो भी अपने प्रधानमंत्री को तो यह काफी गंभीर है एक देश के लिहाज़ से जो विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है.

पंजाब में क्यों प्रधानमंत्री को जान का खतरा?

आपको याद होगा पंजाब का वो वाकया जब पीएम फिरोजपुर में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करने और चुनावी रैली को संबोधित करने जा रहे थे. खराब मौसम की वजह से उनका हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका. इस दौरान उन्होंने सड़क मार्ग से फिरोजपुर जाने का फैसला किया. जब उनका काफिला NH-5 के एक फ्लाईओवर के पास पहुंचा, तो वहां पहले से कुछ प्रदर्शनकारी अपनी मांग को लेकर सड़क पर बैठे थे. जानकारी के मुताबिक किसान पीएम को काला झंडा दिखाकर विरोध ज़ाहिर करने वाले थे. इस वजह से रास्ता बंद कर दिया गया था.

पीएम का काफिला 15-20 मिनट तक फ्लाईओवर पर रुका. प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे एजेंसियों ने काफिले को आगे बढ़ाना सुरक्षित नहीं माना. इसके बाद उन्हें वापस बठिंडा एयरपोर्ट पर वापस लौटना पड़ा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी ने उस वक्त कहा था – “अपने मुख्यमंत्री को धन्यवाद कहना कि मैं भटिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा लौट पाया.”

गृह मंत्रालय ने पीएम मोदी के इस स्टेटमेंट को लेकर एक कमिटी गठित की. कमिटी ने इसे “गंभीर सुरक्षा चूक बताया”.

क्या 2018 में भी प्रधानमंत्री को जान का खतरा था?

Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2018 में भी पीएम की जान का खतरा था. आपको याद होगा भीमा- कोरेगांव जांच का मामला. पुलिस ने उस वक्त खुलासा किया था कि एक पत्र बरामद हुआ है. जिसमें पीएम मोदी के रोड शो को निशाना बनाने की साजिश रची गई थी.

क्या 2023 में भी था PM को जान का खतरा?

The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2023 में पीएम मोदी के केरल दौरे से ठीक पहले बीजेपी प्रदेश कार्यालय को एक पत्र मिला था. उस पत्र में उनके ऊपर आत्मघाती हमले की धमकी दी गई थी. यानी उस वक्त भी पीएम को जान का खतरा था.

2026 में क्यों था प्रधानमंत्री को जान का खतरा?

Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 में पीएम के बेंगलुरु दौरे से पहले पुलिस को बम की धमकी वाला एक कॉल आया. जिसमें कहा गया कि उनके संभावित मार्ग पर विस्फोटक सामग्री वाली छड़ें (जिलेटिन छड़) बिछी हैं. हालांकि, पुलिस ने जांच की और संदिग्ध को हिरासत में लिया.

क्या मणिपुर में भी था प्रधानमंत्री को जान का खतरा?

Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 के मई में मणिपुर में हिंसा शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री वहां लगभग दो साल तक नहीं गए. जबकि, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को वहां कई बार भेजा गया था. ऐसे में विपक्ष ने कई बार सवाल खड़े करते हुए कहा कि पीएम मोदी मंदिर तो जा सकते हैं लेकिन सालों से जल रहे मणिपुर में जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं.

क्या गलवान मसले पर प्रधानमंत्री सदन में चर्चा की?

साल 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे. विपक्ष ने सरकार से चीन के कब्जे और बॉर्डर की स्थिति को लेकर विस्तृत चर्चा की मांग की. लेकिन, सत्ता पक्ष ने इस विषय पर चर्चा नहीं की.

प्रधानमंत्री की ओर से बयान आया-“न कोई हमारी सीमा में घुसा है, न कोई हमारी पोस्ट पर कब्जा हुआ है”. जिसके बाद विपक्ष ने आरोप लगाया कि डोकलाम जैसे महत्वपूर्ण विवाद पर भी प्रधानमंत्री ने संसद में विस्तृत बयान नहीं दिया. हालांकि, संबंधित मंत्रालय ने इसका जवाब दिया था.

Last Updated on July 11, 2026 8:19 pm

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