Modi समर्थक से आलोचक तक: कैसे बदले Sonam Wangchuk के रिश्ते, 18वें दिन भी जारी है भूख हड़ताल?

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 18वें दिन में पहुंच गई है. कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की सराहना करने वाले वांगचुक के रिश्ते सरकार से कैसे बिगड़े? पढ़िए 2023 से 2026 तक की पूरी टाइमलाइन.

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल क्यों जारी है? (Picture credit- AI)
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल क्यों जारी है? (Picture credit- AI)

नई दिल्ली: कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसलों का खुलकर समर्थन करने वाले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ “शानदार बातचीत” की तस्वीरें साझा करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक आज उसी सरकार के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठे हैं. उनकी भूख हड़ताल बुधवार को 18वें दिन में प्रवेश कर गई. स्वास्थ्य संकेतक स्थिर बताए जा रहे हैं, लेकिन उनमें लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. वांगचुक की ओर से संदेश दिया गया है कि यदि लोग उनसे अनशन खत्म करने की अपील कर रहे हैं, तो वे सरकार से यह भी पूछें कि आखिर संवाद करने से इनकार क्यों किया जा रहा है. वर्तमान आंदोलन की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है. हालांकि, यह टकराव केवल इस मांग तक सीमित नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में वांगचुक और केंद्र सरकार के रिश्तों में आए बदलाव की एक लंबी कहानी इसके पीछे है. 2023 में शिक्षा मंत्री के साथ सौहार्दपूर्ण मुलाकात से शुरू हुई यह यात्रा 2024 में आरोपों, 2025 में लद्दाख आंदोलन, HIAL की जमीन लीज रद्द होने, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तारी और अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी भूख हड़ताल तक पहुंच चुकी है.

2023: जब धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था- ‘शानदार बातचीत’

15 मार्च 2023 को सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी तथा हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की सह-संस्थापक गीतांजलि आंगमो ने नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की थी.

मुलाकात के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि उनकी वांगचुक और उनकी पत्नी के साथ “शानदार बातचीत” हुई. उस समय वांगचुक ने भी इस पोस्ट को साझा करते हुए शिक्षा मंत्री का अभिनव शिक्षा मॉडल के प्रति खुले विचार रखने के लिए धन्यवाद दिया था.

2024: UGC मान्यता पर फाइल रोकने का आरोप

गीतांजलि आंगमो का आरोप है कि नवंबर 2024 में जब उन्होंने दोबारा धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की, तब उन्हें बताया गया कि HIAL को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से मान्यता दिलाने वाली फाइल तब तक आगे नहीं बढ़ेगी, जब तक सोनम वांगचुक लद्दाख से जुड़ी अपनी राजनीतिक मांगों को उठाना बंद नहीं करते.

हालांकि, इस आरोप पर सरकार की ओर से इस रिपोर्ट में कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है.

ये भी पढ़ें- ‘Satluj’ फिल्म से छिड़ गई बहस, Amit Shah से पंजाब में ‘Truth Commission’ की मांग

लद्दाख आंदोलन और बढ़ती दूरी

अगस्त 2019 में जब केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन किया और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया, तब सोनम वांगचुक ने इस फैसले का स्वागत किया था. उन्होंने सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद भी दिया था.

लेकिन बाद के वर्षों में लद्दाख में भूमि और रोजगार सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर असंतोष बढ़ा. 2022 तक लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) ने राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण, लोकसभा प्रतिनिधित्व और अलग लोक सेवा आयोग सहित चार प्रमुख मांगें सामने रखीं.

HIAL की लीज रद्द और ‘विच हंट’ का आरोप

अगस्त 2025 में लद्दाख प्रशासन ने HIAL की 40 वर्ष की भूमि लीज रद्द कर दी. वांगचुक ने इसे “विच हंट” बताते हुए आरोप लगाया कि यह उनके राज्य के दर्जे और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को दबाने का प्रयास है.

हिंसक प्रदर्शन, गिरफ्तारी और छह महीने जेल

24 सितंबर 2025 को लेह में राज्य के दर्जे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन हिंसक हो गए. पुलिस फायरिंग में चार प्रदर्शनकारियों की मौत हुई और स्थानीय भाजपा कार्यालय में आग लगा दी गई.

वांगचुक ने हिंसा की निंदा की, लेकिन केंद्र सरकार आश्वस्त नहीं हुई. गृह मंत्रालय ने उनके बयानों को आंदोलन भड़काने वाला बताया और दो दिन बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में ले लिया. वे लगभग छह महीने तक जोधपुर जेल में रहे और मार्च 2026 में रिहा हुए.

क्या फिर बनने लगी थी बातचीत की राह?

रिहाई के बाद वांगचुक ने कहा था कि बातचीत से समाधान निकल सकता है. अप्रैल-मई 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लद्दाख दौरे के बाद उन्होंने दावा किया कि उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा का मुद्दा उठाया.

22 मई को केंद्र और LAB-KDA के बीच हुई बैठक में अनुच्छेद 371 के तहत संवैधानिक सुरक्षा के प्रस्ताव पर सिद्धांततः सहमति बनने की बात सामने आई. हाल ही में केंद्र सरकार ने सातों जिलों के लिए अलग-अलग हिल काउंसिल और एक विशेष “UT-स्तरीय निकाय” बनाने की घोषणा भी की है.

हालांकि, इस घोषणा पर वांगचुक की ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

अब जंतर-मंतर पर 18वें दिन भी जारी है अनशन

सोनम वांगचुक इस समय दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर हैं. आंदोलन का आयोजन ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ कर रही है. वांगचुक का कहना है कि उन्होंने इस मंच का समर्थन इसलिए किया क्योंकि यह खुद को राजनीतिक दलों से दूरी बनाए रखने वाला मंच बताता है.

इस आंदोलन में कांग्रेस सांसद प्रिया सरोज सहित कुछ विपक्षी नेता पहुंचे हैं. तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी समर्थन जताया है. वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त की है. राहुल गांधी अब तक जंतर-मंतर नहीं पहुंचे हैं, हालांकि उन्होंने शिक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों पर अलग अभियान शुरू किया है.

ये भी पढ़ें- Ken Betwa Link Project: 12वें दिन भी जारी आमरण अनशन, विधानसभा में उठेगा विस्थापितों का मुद्दा

20 जुलाई को संसद मार्च की तैयारी

कॉकरोच जनता पार्टी ने घोषणा की है कि 20 जुलाई, मानसून सत्र के पहले दिन, जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला जाएगा. वहीं सोनम वांगचुक का कहना है कि यदि सरकार बातचीत के लिए आगे आती है तो समाधान का रास्ता निकल सकता है, लेकिन फिलहाल उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी.

Last Updated on July 15, 2026 8:03 pm

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *