‘औरंगज़ेब से ज़्यादा मंदिर BJP ने तोड़े हैं’ आरोप में कितना है दम?

Temples Demolish Controversy: क्या वजह है कि हिंदुओं के हमदर्द बताने वाली बीजेपी सरकार पर ऐसे आरोप लग रहे हैं? आंकड़ों में समझने की कोशिश करते हैं.

'औरंगज़ेब से ज़्यादा मंदिर BJP ने तोड़े हैं’ आरोप में कितना है दम?
'औरंगज़ेब से ज़्यादा मंदिर BJP ने तोड़े हैं’ आरोप में कितना है दम?

Temple Demolition Controversy: बीजेपी सरकार को बनारस में पुराने मंदिरों को तोड़ने और नए सिरे से सुंदर कॉरिडोर बनाने को लेकर आलोचना और भर्त्सना दोनों मिले. आरोप तो यहां तक लगाए गए कि औरंगज़ेब के काल में भी इतने मंदिर ध्वस्त नहीं किए गए, जितने बीजेपी के काल में. अयोध्या में राम मंदिर कॉरिडोर याद कीजिए. उस दौर में भी मीडिया के एक छोटे से धरे में ये खबर चली कि राम मंदिर कॉरिडोर बनाने के नाम पर कई पुराने मंदिरों की बलि चढ़ा दी गई. पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी एक वीडियो शेयर करते हुए बताया था कि एक प्राचीन शिव मंदिर को तोड़ा गया. आखिर क्या वजह है कि हिंदुओं के हमदर्द बताने वाली बीजेपी सरकार पर ऐसे आरोप लग रहे हैं? आंकड़ों में समझने की कोशिश करते हैं.

बीजेपी सरकार में कितने मंदिर तोड़े गए?

भक्तों का मानना है कि देश में सबसे अधिक मंदिर औरंगबेज के शासन काल में तोड़े गए. लेकिन दावा तो यह भी किया जा रहा है कि औरंगजेब के शासन काल के बाद सबसे अधिक मंदिर BJP के शासन काल में तोड़े गए. ऐसा हम नहीं बल्कि, संसदीय क्षेत्र बनारस की जनता कह रही है. बीते दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था. वायरल वीडियो में बनारस का एक लड़का कह रहा है- “साहब के शासन काल में बनारस की संस्कृति को बर्बाद कर दिया गया, यहां की धरोहर को नष्ट कर दिया गया. बनारस की हर गलियों में कई मंदिर होते थे, जिनका पौराणिक इतिहास था. 500 साल पुराने मंदिरों को भी BJP सरकार ने तोड़ दिया. काशी-विश्वानाथ कॉरिडोर के नाम पर लोगों के घरों को तोड़ा गया. सरकार को अगर कॉरिडोर ही बनाना था, तो शहर के बाहर बनवाते.

काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर की वजह से वहां के स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों धंधा चौपट हो गया. इसके अलावा मल्लाहों के जीवनयापन के साधनों के साथ भी खिलवाड़ किया गया. आपको याद होगा कि BJP सरकार ने बनारस को क्योटो बनाने का दावा किया था. इस सच्चाई की पोल बरसात के दिनों में खुल जाती है. बरसात के मौसम में इस शहर के हर नाले पानी से लबालब भरे होते हैं. इससे शहर में जाम की समस्या भी रहती है. पैदल चलने में भी लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. बनारस की जनता कहती है कि बनारस को क्योटो बनाने की बात झूठी है.”

स्थानीय दुकानदारों ने क्या कहा?

India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉरिडोर की वजह से स्थानीय लोगों के घरों में ताले लग गए. स्थानीय दुकानदारों ने अपना दुख बयां करते हुए बताया कि वे भीख मांगने को मजबूर हैं. स्थानीय दुकानदार राजू शर्मा ने कहा-“पर्यटन मंत्री ने उस वक्त कहा था कि अगर उन्हें जिता दिया जाता है, तो स्थानीय दुकादारों को मंदिर के आसपास जगह दी जाएगी.”. लेकिन क्या स्थानीय दुकानदारों को जगह दी गई?

300 से अधिक संपत्तियों का किया गया अधिग्रहण

PMO की आधाकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना के तहत 300 से अधिक संपत्तियों का अधिग्रहण किया गया या खरीदा गया. सवाल उठता है कि सरकार ने जिन 300 से अधिक संपत्तियों का अधिग्रहण किया क्या उनके सभी मालिकों को मुआवजा दिया गया?

किसके शासन काल में तोड़े गए सबसे अधिक मंदिर?

न्यूज क्लिक की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वनाथ मंदिर के महंथ राजेंद्र प्रसाद तिवारी ने कहा कि BJP ने औरंगजेब से अधिक मंदिरों को तोड़ा. इतिहासकार Richard M. Eaton के अनुसार औरंगजेब के शासन काल में तकरीबन 15 मंदिरों को ध्वस्त किए गए थे. जबकि, India Today की एक खबर में ‘Noor इलाहाबादी’ का ट्वीट एड किया है, जिसमें BJP के शासन काल में लगभग 200 मंदिर तोड़े जाने को लेकर बात कही गई है.

बांके बिहारी कॉरिडोर के तहत कितने परिवार हुए प्रभावित?

TIO की रिपोर्ट के मुताबिक, बांके बिहारी कॉरिडोर परियोजना के तहत 275 परिवार और 200 दुकानदार प्रभावित हुए. अगर एक परिवार में औसतन 3 लोगों को गिना जाए तो 825 लोगों की रोजी-रोटी छिन गई होगी. वहीं, इस रिपोर्ट में 200 दुकानदारों की दुकानदारी प्रभावित होने की बात कही गई है. ऐसे में कम से कम एक दुकानकार के परिवार में 3 सदस्य होंगे, तो 600 लोगों के भोजन-पानी पर आफत आ गई होगी.

कंक्लूजन

मंदिर के पुजारियों का जीवनयापन चढ़ावे से चलता है. ऐसे में अब आप ही सोचिए कि मंदिर तोड़े जाने से उन सैकड़ों परिवारों का गुजारा कैसे चलता होगा? कितने परिवारों के सदस्य बेरोजगार हो गए होंगे? क्या काशी की गलियों में जितने मंदिरों को तोड़े गए उन पर आश्रित सभी लोगों को उचित मुआवजा दिया गया? PIB की रिपोर्ट में कहा गया है कि 300 से अधिक संपत्तियों को खरीदा या अधिग्रहण किया गया. जबकि, 1400 दुकानदारों, किरायेदारों या मकान मालिकों का पुनर्वास किया गया. क्या जिन लोगों के घर-दुकान तोड़े गए उन सभी को इसके लिए मुआवजा दिया गया? इसके अलावा बांके बिहारी कॉरिडोर को लेकर भी 275 परिवार और 200 दुकानदार प्रभावित हुए. क्या सरकार इन सभी को उचित मुआवजा दे सकी?

Last Updated on July 9, 2026 7:45 pm

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