- धीरेंद्र गुप्ता
पन्ना. केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे चिता आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई के बाद विवाद और गहरा गया है. आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने विस्थापितों की सुरक्षा की परवाह किए बिना धरना स्थल से लोगों को बलपूर्वक हटाया, महिलाओं और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया तथा आंदोलन स्थल को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया. उनका दावा है कि कई आदिवासी महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर उफनती नदी की तेज धारा में उतर गईं, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई जारी रही. इसी बीच आंदोलन के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर ने ऐलान किया है कि चाहे उन्हें जेल भेजा जाए या अस्पताल, उनका आमरण अनशन जारी रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें जबरन भोजन कराया गया या ड्रिप चढ़ाने की कोशिश की गई, तो वह पानी पीना और सांस लेना भी छोड़ देंगे. आंदोलनकारी प्रशासन पर दमनात्मक कार्रवाई और भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं, जबकि इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने विस्थापितों की जान की परवाह किए बिना बर्बर तरीके से लोगों को आंदोलन स्थल से हटाया. उनका कहना है कि पुलिस ने धरना स्थल पर बनाई गई चिताएं, सूली और अन्य प्रतीकात्मक संरचनाओं को नष्ट कर दिया तथा प्रदर्शनकारियों को घसीटकर हिरासत में ले लिया.
“जेल भेज दें या अस्पताल, अनशन जारी रहेगा”
आंदोलन के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि उन्हें चाहे जेल भेजा जाए या अस्पताल, उनका आमरण अनशन जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि वह न तो ड्रिप लगवाएंगे और न ही कुछ खाएंगे.
अमित भटनागर ने कहा, “अगर मुझे जबरन खिलाने की कोशिश की गई या ड्रिप लगाई गई, तो मैं पानी पीना और सांस लेना भी छोड़ दूंगा.”
उन्होंने बताया कि परिवार के लोगों और उनके बुजुर्ग पिता ने भी उन्हें अनशन समाप्त करने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने अपना फैसला नहीं बदला.
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महिलाओं और बच्चों के साथ कार्रवाई का आरोप
आंदोलनकारियों का दावा है कि कई महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर उफनती नदी की तेज धारा में उतर गईं. उनका आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस की कार्रवाई जारी रही.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोबाइल फोन से वीडियो बना रहे युवाओं और महिलाओं को निशाना बनाया गया, उनके साथ मारपीट की गई और उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए.
“400 करोड़ के भ्रष्टाचार का खुलासा करने से पहले आंदोलन तोड़ा गया”
अमित भटनागर का कहना है कि उनका 17 दिनों से चल रहा आंदोलन उस समय समाप्त कराया गया, जब उन्होंने केन-बेतवा, रूंझ, मझगाय, नैगुवा और एनटीपीसी से जुड़े कथित 400 करोड़ रुपये के व्यापक भ्रष्टाचार का खुलासा मीडिया के सामने करने की घोषणा की थी.
उनका आरोप है कि इसी घोषणा के बाद प्रशासन ने आंदोलन स्थल पर कार्रवाई की.
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मुख्यमंत्री पर लगाए आरोप
अमित भटनागर ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि जब उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़े कथित प्रमाण मीडिया के सामने रखने की बात कही, तभी मुख्यमंत्री ने अपना प्रस्तावित पन्ना दौरा रद्द कर खजुराहो में अधिकारियों के साथ बैठक की और आंदोलन के दमन के आदेश दिए.
उन्होंने कहा कि वह अपनी जान की परवाह किए बिना कथित फर्जी ग्राम सभाओं, आदिवासी किसानों के अधिकारों और परियोजनाओं में हुए कथित भ्रष्टाचार की सच्चाई सामने लाएंगे.
वन विभाग और टाइगर रिजर्व से जुड़े आरोप
अमित भटनागर ने टाइगर रिजर्व और वन विभाग की बहुमूल्य लकड़ी की बिना नंबर वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ठेलों से कथित बिक्री का भी आरोप लगाया.
उनका दावा है कि इसमें मिलीभगत के कारण बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है, जिससे सरकार को लगभग 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी जान को खतरा है और उनके पास अपने आरोपों के समर्थन में स्पष्ट प्रमाण होने का दावा है.
Last Updated on July 20, 2026 5:25 pm
