Azam khan की Jauhar University पर बुलडोजर की तैयारी, 38 भवनों के नोटिस से मचा विवाद

रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने के नोटिस के बाद विवाद गहरा गया है. AIMPLB ने कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण और अन्यायपूर्ण बताया, जबकि समाजवादी पार्टी ने इसे चुनिंदा निशाना बनाने का आरोप लगाया.

तोड़ी जाएगी जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतें? (प्रतीकात्मक तस्वीर: created by- AI)
तोड़ी जाएगी जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतें? (प्रतीकात्मक तस्वीर: created by- AI)

नई दिल्ली/रामपुर. उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर 38 इमारतों को गिराने का नोटिस जारी होने के बाद विवाद और गहरा गया है. अब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) भी खुलकर इस मामले में उतर आया है. बोर्ड ने इस कार्रवाई को “पक्षपातपूर्ण, प्रतिशोधपूर्ण और अन्यायपूर्ण” बताया है और योगी सरकार से नोटिस वापस लेने की मांग की है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई केवल कथित अवैध निर्माण के खिलाफ है या फिर विपक्ष और उससे जुड़े संस्थानों पर चुनिंदा कार्रवाई का आरोप सही है? दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतें बिना सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के बनाई गईं और कानून के तहत इन्हें नियमित नहीं किया जा सकता. अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या मामला अदालत पहुंचेगा, क्या नोटिस वापस होगा और हजारों छात्रों के भविष्य पर इसका क्या असर पड़ेगा.

क्या है पूरा मामला?

रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है. प्राधिकरण का दावा है कि इन भवनों का निर्माण सक्षम प्राधिकरण से स्वीकृति लिए बिना किया गया था. विश्वविद्यालय को 15 दिन के भीतर स्वयं इन निर्माणों को हटाने का निर्देश दिया गया है. ऐसा नहीं होने पर प्रशासन कार्रवाई करेगा. यह आदेश उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27 के तहत जारी किया गया है.

AIMPLB ने क्या कहा?

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शुक्रवार को जारी बयान में इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की. बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. एस. क्यू. आर. इलियास ने कहा कि यह केवल एक शैक्षणिक संस्थान के खिलाफ कार्रवाई नहीं है, बल्कि मुस्लिम समुदाय की शैक्षणिक प्रगति पर भी हमला है.

बोर्ड ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि ध्वस्तीकरण नोटिस तुरंत वापस लिया जाए. उसका कहना है कि यदि किसी प्रकार की कानूनी या तकनीकी कमी है, तो उसका समाधान कानूनी प्रक्रिया और संवाद से किया जाना चाहिए, न कि ध्वस्तीकरण के जरिए.

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समाजवादी पार्टी ने भी जताया विरोध

समाजवादी पार्टी ने भी इस कार्रवाई को “अनुचित” बताया है. पार्टी का आरोप है कि जौहर विश्वविद्यालय को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है. सपा का कहना है कि यदि भवन स्वीकृति का मुद्दा है तो प्रदेश के अन्य संस्थानों की भी समान रूप से जांच होनी चाहिए. पार्टी का दावा है कि विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में छात्र कम शुल्क पर पढ़ाई कर रहे हैं और कार्रवाई से उनका भविष्य प्रभावित होगा.

प्रशासन का पक्ष

रामपुर विकास प्राधिकरण का कहना है कि रिकॉर्ड की जांच में केवल मेडिकल कॉलेज और एक अकादमिक ब्लॉक के पास ही वैध भवन स्वीकृति मिली. शेष 38 भवनों के लिए आवश्यक अनुमति का कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया. विश्वविद्यालय प्रबंधन ने दलील दी कि निर्माण उस समय हुआ था जब यह क्षेत्र RDA के अधिकार क्षेत्र में नहीं था, लेकिन प्रशासन ने कहा कि उस समय भी जिला पंचायत सहित सक्षम प्राधिकरण से अनुमति लेना अनिवार्य था.

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आजम खान से क्या है संबंध?

मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का संचालन मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट करता है, जिसके अध्यक्ष समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान हैं. आजम खान फिलहाल विभिन्न मामलों में जेल में हैं. विश्वविद्यालय लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी विवादों के केंद्र में रहा है.

Last Updated on July 19, 2026 2:09 pm

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