क्या है देश की पहली Hydrogen Train? कहां से कहां तक चलेगी, खास क्यों

Indian Hydrogen Train: पीएम मोदी 17 जुलाई को देश के पहले हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे. यह ट्रेन क्यों खास है?

क्या है देश की पहली Hydrogen Train? कहां से कहां तक चलेगी, खास क्यों
क्या है देश की पहली Hydrogen Train? कहां से कहां तक चलेगी, खास क्यों

Indian Hydrogen Train: भारत अब अमेरिका, चीन और जापान जैसे उन देशों में शुमार हो गया, जहां पर हाइड्रोजन ट्रेन को बढ़ावा दिया जा रहा है. देश में पहली हाइड्रोजन ट्रेन 17 जुलाई से शुरू होगी. प्रधानमंत्री मोदी इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे. यह ट्रेन दो घंटे में जींद से सोनीपत की दूरी तय करेगी. इस बीच आने वाले 12 रेलवे स्टेशनों पर यह ट्रेन रुकेगी. ट्रेन नंबर 74010 जींद से सुबह 7:40 बजे रवाना होगी, जो सुबह 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी.

कहां-कहां रुकेगी Hydrogen Train?

रेलवे की आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, Hydrogen Train जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, भम्बेवा, ईशापुर खेड़ी, बुटाना, खंदराई, गोहाना, रभड़ा, लाठ, मोहना और बड़वासनी रेलवे स्टेशन पर रुकेगी. जबकि, वापसी में यह ट्रेन सोनीपत से सुबह 10:40 बजे खुलेगी और दोपहर 1 बजे जींद पहुंचेगी. रास्ते में यह ट्रेन उपरोक्त सभी स्टेशनों पर रुकेगी.

कैसे चलेगी Hydrogen Train?

PIB की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन 10 कोच वाली होगी, जो 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी. यह ट्रेन डीजल या बिजली से चलने के बजाय 1,200 kW हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से चलेगी. इस हाइड्रोजन ट्रेन को भारत में डिजाइन और डेवलप किया गया है. इसके साथ ही यह ट्रेन दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए जींद-सोनीपत रूट को पायलट कॉरिडोर के तौर पर चयनित किया गया है. साथ ही, प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए जींद में एक स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग की सुविधा बनाई गई है. पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) ने जींद में कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस के स्टोरेज और वितरण के लिए लाइसेंस भी जारी किया है.

कैसे काम करती है Hydrogen Train?

हाइड्रोजन ट्रेन मुख्य रूप से हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलती है. जब हाइड्रोजन गैस और हवा में मौजूद ऑक्सीजन मिलकर केमिकल रिएक्शन करती हैं, तो बिजली बनती है और इसी से ट्रेन में लगे मोटर चलते हैं. खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती, बल्कि सिर्फ पानी की भाप निकलती है. इस वजह से यह पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित मानी जाती है.

पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दुनिया के कई देश हाइड्रोजन ट्रेन को बढ़ावा दे रहे हैं. जापान, अमेरिका और चीन जैसे देश भी अपने यहां हाइड्रोजन तकनीक से रेल परिचालन को बढ़ावा दे रहे हैं.

यह भी पढ़ें: रिजर्वेशन Train Ticket मिलना होगा आसान, क्या है IRCTC का नया प्लान?

Last Updated on July 11, 2026 4:00 pm

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