पंचतत्‍व में विलीन हुए अजित पवार, बेटे पार्थ ने दी मुखाग्नि…

बारामती के विद्या प्रतिष्ठान श्मशान घाट में अजित पवार का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।  उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर उनके गांव काटेवाडी से अंतिम संस्कार के लिए बारामती लाया गया।

Funeral rites in Baramati
Funeral rites in Baramati

महाराष्ट्र: बारामती के विद्या प्रतिष्ठान श्मशान घाट में अजित पवार का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।  उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर उनके गांव काटेवाडी से अंतिम संस्कार के लिए बारामती लाया गया।  इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, शरद पवार, सुप्रिया सुले, नितिन गडकरी, एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस मौजूद रहे।

लैंडिंग के दौरान हुआ विमान हादसा

28 जनवरी 2026 की सुबह महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। बारामती में लैंडिंग के दौरान हुए विमान हादसे में राज्य के डिप्टी मुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। यह खबर जैसे ही सामने आई, पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई। सरकार ने तत्काल तीन दिन के राजकीय शोक का ऐलान किया और सभी सरकारी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए।

हादसा उस वक्त हुआ जब विमान बारामती हवाई पट्टी पर उतरने की कोशिश कर रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लैंडिंग के दौरान विमान अचानक संतुलन खो बैठा और जोरदार धमाके के साथ दुर्घटनाग्रस्त हो गया। चंद मिनटों में मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहत और बचाव दल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अजित पवार सहित विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

बारामती की पहचान थे अजित पवार 

अजित पवार का नाम सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं था। वे बारामती के लिए एक पहचान थे, एक भरोसा थे। यही वजह रही कि उनके अंतिम संस्कार के दिन बारामती में जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही हजारों लोग अंतिम दर्शन के लिए सड़कों पर खड़े नजर आए। हर आंख नम थी, हर चेहरा गमगीन। लोग सिर्फ एक झलक पाने को बेताब थे।

अंतिम संस्कार के दौरान पूरे क्षेत्र में “अजित पवार अमर रहें” के नारे गूंजते रहे। नेताओं से लेकर आम लोगों तक, हर किसी ने उन्हें अपने-अपने तरीके से याद किया। राजनीतिक मतभेद उस दिन गौण हो गए थे, सामने सिर्फ एक शून्य था—जिसे भर पाना आसान नहीं।

यह हादसा न सिर्फ एक परिवार, बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। बारामती आज भी सदमे में है, और राज्य एक ऐसे नेता को याद कर रहा है जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

 

Last Updated on January 29, 2026 3:53 pm

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