Trump vs Iran: 300 से ज्यादा ठिकानों पर हमला, होरमुज़ को लेकर नया युद्ध छिड़ा

होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी हमलों, ईरानी जवाबी कार्रवाई और बढ़ती तेल कीमतों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय शांति पर नए संकट के संकेत दे दिए हैं।

होरमुज़ पर युद्ध तेज़: अमेरिका के 140 हमले,
होरमुज़ पर युद्ध तेज़: अमेरिका के 140 हमले,

Trump vs Iran: अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमलों की एक नई लहर शुरू कर दी है। यह कार्रवाई होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बढ़ते टकराव के बीच की गई है। वहीं, तेहरान ने कहा है कि इन ताज़ा हमलों ने पिछले कुछ महीनों के सभी कूटनीतिक प्रयासों को “पूरी तरह निष्फल” कर दिया है।

अमेरिकी सेना ने रविवार को रात 9 बजे GMT से ईरान के खिलाफ नए हमले शुरू किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (Centcom) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि इन हमलों का उद्देश्य “ईरान की उस क्षमता को लगातार कमज़ोर करना है, जिसके जरिए वह होरमुज़ जलडमरूमध्य से स्वतंत्र रूप से गुजरने वाले नागरिक नाविकों और व्यावसायिक जहाज़ों पर हमला कर सकता है।”

सेंटकॉम ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “ईरानी बलों को जवाबदेह ठहराने के लिए इन हमलों का निर्देश दिया है।” ट्रंप ने सप्ताहांत में ईरान पर हुए हमलों का ज़िक्र करते हुए कहा, “हम उन्हें बुरी तरह पीट रहे हैं।”

रविवार को इससे पहले तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था। साथ ही उसने कहा कि उसने एक बार फिर होरमुज़ जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। हिंसा के इस नए दौर ने पिछले महीने हस्ताक्षरित अंतरिम अमेरिका-ईरान युद्धविराम समझौते के भविष्य पर और अधिक सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, सेंटकॉम ने दावा किया कि कुछ जहाज़ अब भी इस जलमार्ग से होकर गुजर रहे हैं।

ये हमले और जवाबी हमले उस लगातार जारी सैन्य चक्र का हिस्सा हैं, जिसमें ईरान इस अहम ऊर्जा मार्ग पर शिपिंग के नियंत्रण को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि इस बार हमलों की गति और दायरा पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गया है। सेंटकॉम के मुताबिक, केवल शनिवार रात को ही लगभग 140 हमले किए गए।

रविवार को ईरान के हमले कतर तक भी फैल गए। कतर युद्धविराम वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था और अप्रैल के बाद पहली बार उस पर हमला हुआ। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जिसे मई की शुरुआत के बाद से निशाना नहीं बनाया गया था, ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन को रोक दिया।

ईरानी मीडिया के अनुसार, रविवार को सीरिक (Sirik) और बंदर अब्बास (Bandar Abbas) के आसपास मिसाइल हमले और विस्फोट हुए। ये दोनों शहर होरमुज़ जलडमरूमध्य पर स्थित महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों के लिए जाने जाते हैं। इनके अलावा नज़दीकी क़ेश्म द्वीप (Qeshm Island) के आसपास भी धमाकों की खबरें आईं।

ईरान ने अमेरिकी हमलों की इस नई लहर की कड़ी निंदा की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इन हमलों ने “पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और शांति स्थापित करने के लिए पिछले कुछ महीनों में किए गए सभी प्रयासों को पूरी तरह बेकार कर दिया है।”

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में आगे कहा, “अमेरिकी शासन ने होरमुज़ जलडमरूमध्य में आवश्यक व्यवस्थाएँ लागू करने की ईरान की प्रक्रिया में खुले तौर पर हस्तक्षेप करके न केवल इस जलमार्ग में असुरक्षा वापस ला दी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक समुद्री यातायात को भी बाधित किया है।”

मंत्रालय ने यह भी कहा कि शनिवार को मस्कट (ओमान) में ईरान और ओमान के बीच हुई वार्ता, जिसमें जलडमरूमध्य और पारगमन मार्गों के प्रबंधन पर चर्चा हुई थी, अमेरिकी दबाव के कारण किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सकी। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने ओमान पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह का दबाव बनाया।

पिछले एक सप्ताह में राष्ट्रपति ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि वह युद्धविराम को समाप्त मानते हैं, हालांकि उन्होंने आगे बातचीत की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया। दूसरी ओर, ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ़ ने रविवार को X पर लिखा, “एकतरफ़ा समझौतों का दौर अब खत्म हो चुका है। हमने पहले ही कहा था—या तो अपना वादा निभाइए या इसकी कीमत चुकाइए। अब हकीकत आपके दरवाज़े पर दस्तक दे रही है।”

यह नया टकराव वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुए उस अंतरिम समझौते को कमजोर करता दिख रहा है, जिसका उद्देश्य होरमुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना और 60 दिनों की अतिरिक्त बातचीत के बाद युद्ध को समाप्त करना था।

फरवरी के अंत में शुरू हुए इस संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है। ऊर्जा कीमतों में तेज़ उछाल आया है और वैश्विक महंगाई बढ़ी है। खासकर पेट्रोल की बढ़ती कीमतें नवंबर में होने वाले अमेरिकी संसदीय चुनावों से पहले राष्ट्रपति ट्रंप के लिए राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मुद्दा बन गई हैं।

सोमवार को टोक्यो में वायदा कारोबार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में 3.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अमेरिकी मानक WTI (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट) कच्चा तेल 74 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुँच गया।

ईरान लंबे समय से होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज़ों से स्थायी रूप से शुल्क वसूलने की व्यवस्था लागू करना चाहता है। युद्ध से पहले दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती थी। ईरान ने जहाज़ों को चेतावनी दी है कि वे उसकी अनुमति के बिना इस जलमार्ग से न गुजरें।

ईरान द्वारा हाल ही में गठित पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने रविवार को कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी सेना की हालिया “अवैध गतिविधियों” के कारण फिलहाल होरमुज़ जलडमरूमध्य से आवाजाही संभव नहीं है। प्राधिकरण ने कहा कि “जैसे ही क्षेत्र में स्थिरता और शांति बहाल होगी, जहाज़ों को आवश्यक परमिट जारी कर दिए जाएंगे।”

अमेरिका ने मंगलवार को ईरानी कच्चे तेल की बिक्री की अनुमति देने वाला लाइसेंस पहले ही रद्द कर दिया था। उसका कहना है कि ईरान की “आक्रामकता, धमकियों और मनमाने बयानों” के बावजूद उसकी सेनाएँ समुद्री मार्गों पर स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैनात हैं।

अमेरिकी नौसेना के नेतृत्व वाले जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर ने भी अपनी एडवाइजरी दोहराते हुए कहा कि सुरक्षा खतरे के बावजूद ओमान के पास स्थित विस्तारित दक्षिणी समुद्री मार्ग से दोनों दिशाओं में जहाज़ों की आवाजाही अब भी संभव है।

सेंटकॉम ने शनिवार को दावा किया कि इस सप्ताह तीन रातों के दौरान अमेरिकी सेना ने ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। वहीं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि जवाबी कार्रवाई में उसने जॉर्डन, कुवैत, ओमान और कतर में कई लक्ष्यों पर हमला किया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

Last Updated on July 13, 2026 11:06 am

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