क्या भारत में जरूरत से ज्यादा Ethanol बनाया जा रहा है? जानिए इथेनॉल से जुड़े सवालों के जवाब

Ethanol Blending in India: देशभर में ई-20 पेट्रोल की चर्चा के बीच अब लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. जानिए, इथेनॉल से जुड़े अहम सवालों के जवाब.

क्या भारत में जरूरत से ज्यादा Ethanol बनाया जा रहा है? जानिए इथेनॉल से जुड़े सवालों के जवाब
क्या भारत में जरूरत से ज्यादा Ethanol बनाया जा रहा है? जानिए इथेनॉल से जुड़े सवालों के जवाब

Ethanol Blending in India: इन दिनों ई-20 पेट्रोल सोशल मीडिया से लेकर तमाम मीडिया घरानों में चर्चा का विषय बना हुआ है. बीते दिनों सोशल मीडिया पर इसको लेकर कई वीडियो वायरल हुए. बिहार के एक यूट्यूबर का एक वीडियो इथेनॉल युक्त पेट्रोल में गड़बड़ी को लेकर था. कथित वीडियो को लेकर यूट्यूबर के खिलाफ नागपुर के साइबर थाने में केस दर्ज हुआ. यूट्यूबर ने कथित दावा किया था कि इथेनॉल में गड़बड़ी की वजह से उनकी गाड़ी खराब हो गई. इसके अलावा भी कई वीडियोज और रिपोर्ट्स सामने आए, जिसमें दावा किया गया कि ई-20 पेट्रोल की वजह से गाड़ियों के इंजन समेत अन्य पार्ट-पुर्जे खराब हो रहे हैं. इथेनॉल के लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं. आइए, जानते हैं Ethanol से कुछ अहम सवालों के जवाब.

क्या देश में जरूरत से ज्यादा Ethanol बनाया जा रहा?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने तय समय से 5 साल पहले ही पेट्रोल में 20% इथेनॉल (E20) मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है. इसके लिए सरकार ने डिस्टिलरी लगाने को बढ़ावा दिया, बैंकों ने करोड़ों रुपये का कर्ज दिया और तेल कंपनियों ने लंबे समय के लिए इथेनॉल खरीदने के समझौते किए. इससे देश में इथेनॉल बनाने की क्षमता तेजी से बढ़ी. लेकिन अब एक नई समस्या सामने आ रही है. इथेनॉल बनाने की क्षमता मौजूदा मांग से ज्यादा हो गई है. यानी देश जरूरत से अधिक इथेनॉल बना सकता है.

क्या भारत इथेनॉल एक्सपोर्ट करेगा?

इंडस्ट्री का कहना है कि भारत में इथेनॉल उत्पादन की क्षमता करीब 2,000 करोड़ लीटर हो चुकी है, जबकि पेट्रोल में मिलाने और दूसरे औद्योगिक इस्तेमाल के लिए फिलहाल करीब 1,300 करोड़ लीटर की जरूरत है. यानी लगभग 700 करोड़ लीटर की अतिरिक्त क्षमता मौजूद है. ऐसे में सरकार भविष्य में इथेनॉल निर्यात (Export) पर भी विचार कर सकती है.

क्या भारत के पास जरूरत से ज्यादा इथेनॉल पड़ा है?

नहीं, अभी ऐसा नहीं है कि टैंकों में इथेनॉल बिना बिके पड़ा हो. चिंता यह है कि देश ने जितनी फैक्ट्रियां बनाई हैं, उनकी उत्पादन क्षमता मौजूदा मांग से कहीं ज्यादा है. अगर मांग नहीं बढ़ी तो कई प्लांट पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाएंगे.

इथेनॉल क्या होता है?

इथेनॉल एक तरह का बायो-फ्यूल है. इसे गन्ने के शीरे, मक्का, चावल, गेहूं और दूसरे कृषि उत्पादों से बनाया जाता है. इसे पेट्रोल में मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है.

पेट्रोल में इथेनॉल क्यों मिलाया जाता है?

  • सरकार का मानना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है.
  • विदेशी मुद्रा की बचत होती है.
  • प्रदूषण कम होता है.
  • किसानों को अतिरिक्त आय मिलती है.

भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग कब शुरू हुई?

  1. 2001 में 5% इथेनॉल मिलाने के पायलट प्रोजेक्ट से शुरुआत हुई.
  2. 2022 में भारत ने 10% ब्लेंडिंग (E10) का लक्ष्य हासिल किया.
  3. अब 2025-26 में 20% ब्लेंडिंग (E20) का लक्ष्य भी पूरा कर लिया गया.

इथेनॉल उद्योग कितना बढ़ा?

2014 में उत्पादन क्षमता करीब 421 करोड़ लीटर थी. अब यह बढ़कर करीब 2,000 करोड़ लीटर हो गई है. पेट्रोल में मिलाने के लिए इथेनॉल की खरीद भी कई गुना बढ़ चुकी है.

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क्या निवेश पर खतरा है?

अगर सरकार फिर से E10 पर लौटती है, तो इथेनॉल प्लांट, स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स में लगाए गए करीब 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश पर असर पड़ सकता है. इसलिए सरकार फिलहाल E20 से पीछे हटने के पक्ष में नहीं है.

आगे क्या होगा?

जानकारों का कहना है कि आने वाले वर्षों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या बढ़ेगी और सरकार भविष्य में E30 जैसे अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर भी विचार कर सकती है. अगर घरेलू मांग तेजी से नहीं बढ़ी, तो भारत के लिए इथेनॉल का निर्यात एक अहम विकल्प बन सकता है.

Last Updated on July 20, 2026 5:23 pm

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